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देश की प्रगति में पूर्वांचल की प्रतिभाएं निभा रहीं महत्वपूर्ण भूमिका: फडणवीस

देश की प्रगति में पूर्वांचल की प्रतिभाएं निभा रहीं महत्वपूर्ण भूमिका: फडणवीस

माटी संस्था के नवें पूर्वांचल महोत्सव माटी-9 मुंबई का भव्य आयोजन मुंबई। पूर्वांचल की संस्कृति, विचार, लोक परंपरा, साहित्य, कला और सामाजिक चेतना को समर्पित माटी संस्था द्वारा आयोजित नवां पूर्वांचल महोत्सव ‘माटी-9 मुंबई’ शनिवार को मुंबई विश्वविद्यालय के कालिना कैंपस स्थित स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में उत्साह के साथ संपन्न हुआ। मुंबई की धरती पर आयोजित इस महोत्सव ने पूर्वांचल की सांस्कृतिक विरासत, सामाजिक चेतना और राष्ट्रीय योगदान का भव्य उत्सव प्रस्तुत किया।

मुख्य अतिथि का संबोधन

कार्यक्रम के सम्मान सत्र को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि देश के आध्यात्मिक केंद्र पूर्वांचल का देश की आर्थिक राजधानी मुंबई से यह संगम केवल सांस्कृतिक आयोजन नहीं, बल्कि भारत की आत्मा और उसकी विकास यात्रा का एक सशक्त प्रतीक है। उन्होंने कहा कि पूर्वांचल ने देश को संत, साहित्यकार, विचारक, वैज्ञानिक, योद्धा और कर्मयोगी दिए हैं तथा आज भी देश की प्रगति में पूर्वांचल की प्रतिभाएं महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

पूर्वांचल सांस्कृतिक ऊर्जा के केंद्र

सम्मान सत्र की अध्यक्षता कर रहे जम्मू-कश्मीर के माननीय उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने कहा कि पूर्वांचल केवल एक भौगोलिक क्षेत्र नहीं, बल्कि भारत की चेतना, संस्कार और सांस्कृतिक ऊर्जा का केंद्र है। उन्होंने कहा कि पूर्वांचल की मिट्टी ने सदियों से देश को विचार, अध्यात्म, संघर्ष और राष्ट्रसेवा की प्रेरणा दी है। आज देश के विभिन्न क्षेत्रों में पूर्वांचल के लोग अपनी प्रतिभा और कर्मनिष्ठा से भारत निर्माण की नई इबारत लिख रहे हैं।

माटी संस्था का कार्य

वरिष्ठ सांसद और माटी संस्था के संरक्षक जगदंबिका पाल ने कहा कि माटी संस्था लगातार उन प्रतिभाओं और व्यक्तित्वों को सम्मानित करने का कार्य कर रही है, जिन्होंने अपनी मेहनत, प्रतिभा और सामाजिक योगदान से राष्ट्र को नई दिशा दी है। उन्होंने कहा कि पूर्वांचल की मिट्टी में जन्मे लोगों ने देश के हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का परचम लहराया है और माटी उनके योगदान को सम्मानित करने का कार्य कर रही है।

संस्था निरंतर नए कार्य कर रही

अपने स्वागत वक्तव्य में माटी संयोजक आसिफ आजमी ने कहा कि माटी संस्था पूर्वांचल की संस्कृति, साहित्य, कला और सामाजिक सरोकारों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के उद्देश्य से निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि संस्था केवल सांस्कृतिक आयोजनों तक सीमित नहीं है बल्कि शीर्ष ही दिल्ली-एनसीआर में एक पूर्वांचल सांस्कृतिक केंद्र की स्थापना करने जा रहे हैं।

कार्यक्रम में महाराष्ट्र सरकार में मंत्री और वरिष्ठ नेता आशीष शेलार, विधायक राज हंस सिंह, विधायक संदीप उपाध्याय विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।

नौ विभूतियों को मिला सम्मान

माटी सम्मान सत्र के दौरान विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाली पूर्वांचल की नौ विभूतियों को माटी सम्मान-9 से सम्मानित किया गया। सम्मान प्राप्त करने वालों में रामाश्रय पांडे, कमोडोर डॉ. अशोक यादव, शारदा प्रसाद सिंह, वी.के. सिंह, अजय हरिनाथ सिंह, कुशल टंडन, आर.जे. सिंह तथा डॉ. शैलेश श्रीवास्तव, राहुल लल्लन तिवारी शामिल रहे। पूर्वांचल की नई पीढ़ी, प्रतिभाओं और समाज की आकांक्षाओं को मंच देने का कार्य भी कर रही है।

विशेष संवाद का आयोजन

महोत्सव के उद्घाटन सत्र में पूर्वांचल के युवाओं के लिए कौशल विकास और अवसरों पर विशेष संवाद आयोजित किया गया। इसमें प्रमुख आयुक्त कस्टम्स पंकज सिंह और केईएम अस्पताल के डीन डॉ. हरिश एम. पाठक ने युवाओं से संवाद किया।

कवि सम्मेलन में कविताओं से श्रोता मंत्रमुग्ध

कवि सम्मेलन में असलम हसन, शकील आजमी, आलोक श्रीवास्तव अविरल, डॉ. सागर, स्वप्निल तिवारी, ऋतेश राजवाड़ा और विश्वदीप जीस्त ने अपनी कविताओं और रचनाओं से दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया। विशेष आकर्षण के रूप में डॉ. सच्चिदानंद जोशी की चर्चित एकल प्रस्तुति ‘अपनी-अपनी काशी’ ने दर्शकों को भारतीय सांस्कृतिक विरासत और काशी की आत्मा से जोड़ने का कार्य किया।

संगीत सत्र में लोक गायकी

संगीत सत्र में पद्मश्री मालिनी अवस्थी ने अपनी लोक गायकी और अवधी-भोजपुरी गीतों की प्रस्तुति से पूरे वातावरण को पूर्वांचल की सांस्कृतिक सुगंध से भर दिया। उनकी प्रस्तुति ने मुंबई में बैठे पूर्वांचलवासियों को अपनी मिट्टी और जड़ों से भावनात्मक रूप से जोड़ दिया।

विशेष आकर्षण

महोत्सव का एक विशेष आकर्षण तीन कलाकारों मंती शर्मा, अनिल शर्मा और प्रवीण पटेल द्वारा चित्रकला के माध्यम से पूर्वांचल की सांस्कृतिक आत्मा और भारत की विविधता को कैनवास पर जीवंत करना भी रहा, जिसने दर्शकों का विशेष ध्यान आकर्षित किया।

कार्यक्रम के अंत में लोगों ने पूर्वांचली व्यंजनों – बाटी-चोखा, पूड़ी-सब्जी, लौंगलता, ठेकुआ और अन्य पारंपरिक स्वादों का आनंद लिया। मुंबई की धरती पर आयोजित यह महोत्सव पूर्वांचल की सांस्कृतिक चेतना, सामाजिक ऊर्जा और राष्ट्रीय योगदान का एक यादगार उत्सव बन गया।

Source: Hindustan Hindi